संकट में परीक्षार्थी



 संकट में परीक्षार्थी




आम तौर पर 12th पास होने के बाद काफी बैच्चो के मान में प्रोफेशनल कोर्स करने की इच्छा रहती है।
     सदियों से लेकर आज तक दो प्लेटफॉर्म ऐसे है जिसमे बच्चे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है,इसमें प्रमुख रूप से IIT और मेडिकल आते है। जिसके ऊपर आज संकट का बदल छाया हुआ है, IITऔर मेडिकल में दाखिल लेने के लिए इंट्रेंस एग्जाम देना पड़ता है।राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली इन परीक्षाओं को प्रतेक वर्ष जून-जुलाई तक सम्पन्न करा दिया जाता था,परंतु इस वर्ष  "covid19 महामारी" के कारण JEE और NEET की प्रवेश परीक्षा अब तक दो बार निरस्त हो चुकी है।
परीक्षार्थी भी असमंजस में पड़े है,की इस बार परीक्षा होगी कि नही,  अगर होगी तो कैसे इस समय की बात करे तो ज्यादा संख्या में परीक्षा देने वाले महाराष्ट्र से है, आप महाराष्ट्र का हाल तो जानते ही है, वहां औसतन प्रतिदिन 10,000 नये केस रोज मिल रहे है,तो ऐसे स्थिति में वहां के लोग इसे लेकर बड़ा चिंतित है।
दूसरे सर्वाधिक बच्चे UP से है, वहाँ भी लगभग वही स्थिति है, ऐसे में कुछ राजनीतिक पटिया भी इस परीक्षा में हिस्सा ले रही है,वो भी ट्विटर, फेसबुक और व्हाटसअप पर उन्हें किसी से कुछ मतलब नही है बस वो अपने क्लास के टॉपर बने रहे।
कुछ फेसबुकिया नेताओ का मानना है कि परीक्षाये न हो उनका कहना है कि, इस महामारी में बच्चों की जिंदगी के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है, उनका ये भी कहना है  की सरकार को बच्चों के जिंदगी से कोई मोह नही है वो बस अपना राजस्व देखती है।



अब बचे खोचे नेता जो अनपढ़ है जिन्हें ट्विटर और फेसबुक चलने नही आता है वो तो अपनी पुष्तैनी विरोध कला में माहिर है "बिना कुछ सोचे समझे दिल्ली में पोस्टर और बैनर लेकर और उसपर #POSTPONE EXAMS#JEE/NEET लिख कर 20-40 आदमियों के साथ विरोध प्रदर्शन में बैठ जाते है"।
मतलब विपक्ष में रहकर अब यही सब काम करना रहगया है, खैर हमसे क्या।
विरोद प्रदर्शन करने वालो की कमी नही है दिल्ली, बिहार,UP आदि राज्यो में भी हो रहे है,हमने हाल ही में देखा लखनऊ में #JEE/NEET  की परीक्षा होने के विरोध में कुछ राजनीतिक पाटियों ने धरना पर बैठे विरोध कर रहे थे, ये तो इनका काम हो गया, अब पुलिस का जो मनचाहा काम है उसे तो उन्हें करना ही होगा।जो लाठिया बरसी  पुछो ही मत।



मेरे हिसाब से ये नेता अखबार से रूबरू नही होतो है ,नही तो ये हाल न हुआ होता, सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओ को खारिज कर दिया है जिसमें JEE और NEET को स्थगित करने की मांग की गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में ये कहा कि परीक्षा फिर से स्थगित हुआ तो बच्चो को अपने कैरियर का एक साल बर्बाद करना पड सकता है।



इस समय पूरे भारत में कोरोना अपना बिकराल रूप दिखा रहा है, और इस समय हमे कोई लापरवाही नही करनी चाहिए।
अगर ये परीक्षा होती है तो सरकार को इस महामारी के दौर में छात्रों की सेहत का पूरा ध्यान देकर ही प्रवेश परीक्षा ले।
अब बच्चो की चिंता का सबसे बड़ा कारण ये है कि अगर परीक्षाये हुई और सेंटर कही दूर दूसरे जिले या प्रदेश में है तो उन्हें जाने-आने में दिक्कतो का सामना करना पड़े गया,इस समय हर राज्य या जिले का अपना -अपना अलग कानून बन गया है,किसी जिले में ट्रांस्पोर्ट की समस्या तो कोई-कोई जिला पूर्ण रूप से लॉकडौन है ऐसे स्थिति में आखिर बच्चे करे तो करे क्या।
सरकार खुद चाहती है कि बच्चों का एक साल बर्बाद न हो, मेरे हिसाब से अब 99% परीक्षा जरूर होगी, मगर सरकार को अब भी कुछ अपने नियम और कानून में बदलाव की आवसक्ता है परीक्षार्थी भी अपने पूर्ण सुरक्षा से ही परीक्षा देने निकले। 



मै लेखक आप के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं ।।

No comments:

Powered by Blogger.