किसान आंदोलन (कृषि विधेयक2020)

 किसानो का आंदोलन



हमारा भारत कृषि प्रधान देश है, और जो देश कृषि प्रधान होता है उस देश के नागरिक भगवान के रूप में किसान को मानते है, और माने भी क्यों न प्रतिवर्ष किसान अपना खून पसीना एक करके हमे अनाज देता है, हालांकि हम उसके एवज में कुछ धन भी देते है मगर, किसान का घर भले ही टपकता हो लेकिन बारिश की कामना जरूर करता है ताकि फसल अच्छे हो , तो इतने परिश्रम करने पड़ते हैं।

किसान सरकार के खिलाफ सड़को पर क्यो आएं, आइये जानते है 


अभी हाल ही में सरकार ने 3 कृषि विधेयक 2020 संसद में पारित किया जिसे लेकर किसानों में आक्रोश है।

1 आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 

इसमें कहा गया है कि व्यपारी आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर सकता है मगर "आपदा और युद्ध" में नही।

दरहसल ये पहले होता था आजादी के बाद, मगर इसमें बड़े बड़े व्यापारी इसका दुरुपयोग करते थे,किसानो से सस्ती दामो पर अनाज खरीद कर कुछ महीनों बाद उसे बेचते थे, जिससे किसान को कम मुनाफा होता था और बड़े ब्यापारी को ज्यादा मुनाफा होता था।

मनमोहन की सरकार ने कला बाजारी घोसित करके इसे बंद करवा दिया था ।

वर्तमान सरकार इसे पुनः लागू करने वाली है।

मेरे हिसाब से ये गलत है आप अपनी राय जरूर दे।



2 मूल्य आस्वासन पर बंदोबस्ती और सुरछा समझौता ( अनुबंध कृषि) Price Before Forming

 

इसमें किसानों को बुआई ले दौरान  ही एक मानक तय किया गया है यानी बुआई के समय जो मूल्य है वही कटाई के बाद भी मेले गया ।

ये तो मेरे हिसाब से किसानों के हित के लिए ही है,

आइये जानते है कैसे ।

मान लिजिये  एक चिप्स कंपनी है उसे प्रति वर्ष आलू की खरीद करनी है,तो कंपनी मालिक सीधे किसानों के पास जार कर उसके खेत का अनुबंध करता है मान लिया जाए कि बोआई के समय आलू 30 rs किलो है, तो कंपनी उस किसान से 30 में खरीदेगा अब चाहे बाजार में आलू 10 में ही क्यों न बिक रहा है , इसमें किसानों को ज्यादा परेशानी भी नही होगी और अपना सामान अच्छे मूल्य पर बेच भी देगा। इसी लिए इसे price before forming कहा जाता है।



3 कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य

इस विधेयक का मूल है कि किसान अपना अनाज मंडी के अलावा भारत मे कही भी बेच सकता है। आप की जानकारी के लिए बतादूँ भारत का केवल  6 प्रतिसत अनाज ही मंडी में बिकते है बाकी 94 */. अनाज किसान अपने आसपास में ही बेच देते है।

इसके पहले छोटे किसान अपना अनाज बिचौलियों को बेच देते थे अब इस विधेयक के कारण बंद हो जाये गया। 



आंदोलन का कारण



* सरकार ने कहा कि किसान अपना अनाज अब घर बैठे किसी भी राज्य में बेच सकता है, विरोध यहा पैदा होता है  कि जो मंडिया है अब वहा किसान अपना अनाज नही बेचेगा, इससे ये होगा कि आने वाले समय मे मंडिया धीरे धीरे खत्म हो जायेगी।



* दूसरा विरोध ख़रीददारी पर है ,आगर बाहर समान बिके गा तो खरिदेगा कौन, बड़ी बड़ी कंपनिया ही खरीदेगी और ख़रीद कर अपने कोल्ड स्टोरेज में रखेंगे ताकि सही समय आने पर मार्किट में महँगे दामो में बेचा जा सके।


यही कारण है किसानों के विरोध आंदोलन का ।

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